राष्ट्रीय
ध्वज हमारे देश की पहचान है। इसलिए हर भारतीय का यह कर्तव्य है कि वह भारतीय
तिरंगे को पूरा सम्मान दे। कोई भी व्यक्ति तिरंगे की गरिमा को धूमिल ना करे, इसके लिए भारतीय क़ानून में कुछ
धाराएँ बनाई गई है। फ्लैग कोड इंडिया- 2002 में राष्ट्रीय
ध्वज से जुड़ी कुछ ख़ास बातों का ज़िक्र किया गया है, जिसे
हम भारतीयों को जानना ज़रूरी है। सन् 2002 के पहले आम जनता राष्ट्रीय दिवस को छोड़ किसी और
दिन इसे किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं लगा सकती थी। सिर्फ़ सरकारी कार्यालयों में
ही इसे लगाया जा सकता था। सन् 2002
में भारत के जाने माने उद्योगपति नवीन जिंदल ने अपने कार्यालय के
ऊपर राष्ट्रीय ध्वज लगाया था, जिसके लिए उन्हें सूचित किया
गया कि उन्हें ऐसा करने पर क़ानूनी कार्रवाई से गुज़राना होगा। इसके विरोध में
उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में
एक जनहित याचिका इस बाबत दायर की कि भारत की आम जनता को सम्मान के साथ राष्ट्रीय
ध्वज लहराने और उसे प्यार देने का नागरिक अधिकार है। यह मामला उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय में गया और न्यायालय ने भारत सरकार को इस मामले पर विचार करने
के लिए एक कमेटी बिठाने की सलाह दी। अंत में भारतीय मंत्रालय ने एक संवैधानिक
संशोधन कर सभी भारतवासियों को साल के 365 दिन राष्ट्रध्वज सम्मान के साथ लगाने का
अधिकार दिया।

भारतीय ध्वज को फहराने व प्रयोग करने के बारे में दिये गए निर्देश हैं।
- 'फ्लैग कोड ऑफ इंडिया' के तहत झंडे को कभी भी ज़मीन पर नहीं रखा जाएगा ।
- उसे कभी पानी में नहीं डुबोया जाएगा और किसी भी तरह नुक़सान
नहीं पहुँचाया जाएगा। यह नियम भारतीय संविधान के
लिए भी लागू होता है।
- अगर कोई शख़्स झंडे को किसी के आगे झुका देता हो, उसे कपड़ा बना देता हो, मूर्ति में लपेट देता हो या फिर किसी मृत व्यक्ति
(शहीद हुए आर्म्ड फोर्सेज के जवानों के अतिरिक्त) के शव पर डालता हो, तो इसे तिरंगे की इन्सल्ट माना जाएगा। तिरंगे की यूनिफॉर्म बनाकर पहन लेना भी ग़लत है।
- अगर कोई शख़्स कमर के नीचे तिरंगा बनाकर कोई कपड़ा पहनता हो तो
यह भी तिरंगे का अपमान है।
- तिरंगे को अंडरगार्मेंट्स, रुमाल या कुशन आदि बनाकर भी इस्तेमाल नहीं किया
जा सकता।
तिरंगे को फहराने के नियम
- सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही तिरंगा फहराया जा सकता है।
- फ्लैग कोड में आम नागरिकों को सिर्फ़ 'स्वतंत्रता दिवस' और 'गणतंत्र दिवस' पर
तिरंगा फहराने की छूट थी, लेकिन 26 जनवरी, 2002 को सरकार ने इंडियन फ्लैग कोड में संशोधन किया और
कहा कि कोई भी नागरिक किसी भी दिन झंडा फहरा सकता है, लेकिन वह फ्लैग कोड का पालन करेगा।
- जब भी झंडा फहराया जाए तो उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। उसे
ऐसी जगह लगाया जाए, जहाँ से वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
- सरकारी भवन पर झंडा रविवार और अन्य छुट्टियों के दिनों में भी
सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है, विशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता
है।
झंडे का प्रदर्शन सभा मंच पर किया जाता है तो उसे इस प्रकार
फहराया जाएगा कि जब वक्ता का मुँह श्रोताओं की ओर हो तो झंडा उनके दाहिने ओर हो।
झंडा किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर
बीचोंबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाए।
फटा या मैला झंडा नहीं फहराया जाता है।
झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है।
किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊँचा या ऊपर
नहीं लगाया जाएगा, न ही बराबर में रखा जाएगा।
झंडे पर कुछ भी लिखा या छपा नहीं होना चाहिए।
जब झंडा फट जाए या मैला हो जाए तो उसे एकांत में पूरा नष्ट किया
जाए।
flag folding instructions india video for help